अफगानिस्तान में हिंसा पर यूएन ने जताई चिंता, कहा- अगर इसे नहीं रोका गया तो साल 2021 देश के लिए भयावह होगा

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने चेताया है कि अगर अफगानिस्तान में हो रही हिंसा की घटनाओं में कमी नहीं होती है तो साल 2021 देश के लिए भयावह साबित हो सकता है। यूएन के अनुसार ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो युद्ध ग्रस्त देश बीते 10 साल से अधिक समय के मुकाबले 2021 में अब तक की सबसे ज्यादा नागरिक हताहत संख्या का सामना कर सकता है।

ये भी पढ़ें: पीओके चुनाव में इमरान खान की पार्टी ने जीती 25 सीटें, विपक्ष ने लगाया धांधली का आरोप

लड़ाई और हिंसक व गंभीर हो गई है

रिपोर्ट के अनुसार एक मई से मारे जाने वाले और घायल होने वाले नागरिकों की संख्या में आई तेजी चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल यहां से वापस जा रहे हैं और तालिबान के साथ लड़ाई और हिंसक व गंभीर हो गई है। इसके अनुसार मई-जून की अवधि में लगभग उतने ही नागरिक हताहत हुए जितने इससे पहले के चार महीनों में दर्ज हुए थे।

यहां मई-जून में 783 नागरिक मारे गए थे और 1609 घायल हुए थे। 2009 में यूएनएएमए द्वारा दिए आंकड़े इन महीनों के लिए सबसे अधिक था। अमरीकी सैनिकों की वापसी और तालिबान की बढ़ती आक्रामकता के बीच इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच यहां 876 नागरिक मारे गए और 1915 घायल हुए।

देश के आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान दें

यूएनएएमए की अध्यक्ष डेबरा लियोन के अनुसार वे तालिबान और अफगानिस्तान के नेताओं से अनुरोध करती हैं कि वे संघर्ष के गंभीर परिणामों और देश के आम नागरिकों पर पड़ने वाले इसके विनाशकारी प्रभाव पर ध्यान दें। रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर बढ़ती हिंसा न रोका गया तो इस साल अभूतपूर्व संख्या में अफगानी नागरिक हताहत होंगे।

ये भी पढ़ें: इंडोनेशिया में कोरोना का मासूमों पर कहर, एक सप्ताह में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत

संयुक्त राष्ट्र के दूत डेबरा ने तालिबान और अफगानिस्तानी नेताओं से बातचीत को तेज बढ़ाने की अपील की है। अफगानिस्तान के खिलाफ चल रही लड़ाई को रोकने,अफगानिस्तानी नागरिकों की रक्षा करने और उन्हें बेहतर भविष्य की आशा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना अंतराष्ट्रीय शांति के लिए बेहतर होगा और ये बहुत जरूरी है।