नई दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान किसी न किसी तरह से उसकी मदद करने में जुटा हुआ है। इसी के तहत पाकिस्तान सरकार ने बुधवार को तालिबान आतंकी मुल्ला मोहम्मद रसूल को रिहा कर दिया है। मुल्ला बीते पांच वर्ष से पाकिस्तान की जेल में बंद था। मुल्ला रसूल को मार्च 2016 में बलूचिस्तान प्रांत में गिरफ्तार करा गया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुल्ला तालिबान का जाना-माना नाम है। मगर मुल्ला अख्तर मंसूर के तालिबान प्रमुख बनने के विरोध में उसने अपना अलग संगठन खड़ा कर लिया। इसके बाद पाकिस्तान ने उसे कैद कर लिया और उसे पकड़कर जेल में डाल दिया था। तब से वो कैद में था।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2015 में पश्चिमी फराह प्रांत में तालिबान लड़ाकों की एक बैठक में रसूल को एक अलग समूह का नेता माना गया था। रसूल का समर्थन करने वाले लड़ाकों ने मंसूर पर अपनी व्यक्तिगत लालच को लेकर पाकिस्तान के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर की मौत के बाद रसूल और मंसूर दोनों ने तालिबान के नेतृत्व का दावा किया था।
रसूल के नेतृत्व वाले गुट ने अफगान सरकार के साथ शांति वार्ता का विरोध किया था। मंसूर पर मुल्ला उमर की मौत को छिपाने का आरोप लगा था। तालिबान के संस्थापक, उमर की 2013 में मौत हो गई थी। उसकी मौत को दो साल तक छिपाकर रखा गया था।